वो जगह जहाँ दुनिया का सबसे बड़ा सुकून मिलता है कल्पना कीजिए एक ऐसी जगह, जहाँ पहाड़ों के बीच से एक नदी बह रही हो, चारों तरफ देवदार के ऊँचे-ऊँचे पेड़ हों, और एक ऐसी शांति हो जो आपके मन के सारे शोर को खत्म कर दे।

 वो जगह जहाँ दुनिया का सबसे बड़ा सुकून मिलता है

कल्पना कीजिए एक ऐसी जगह, जहाँ पहाड़ों के बीच से एक नदी बह रही हो, चारों तरफ देवदार के ऊँचे-ऊँचे पेड़ हों, और एक ऐसी शांति हो जो आपके मन के सारे शोर को खत्म कर दे। ये कोई फिल्मी जगह नहीं है, ये है उत्तराखंड के नैनीताल में स्थित कैंची धाम।


आज की भाग-दौड़ भरी जिंदगी में जब लोग लाखों-करोड़ों खर्च करके भी सुकून नहीं खरीद पाते, तब दुनिया के सबसे अमीर और सफल लोग इस छोटे से आश्रम में आकर जमीन पर बैठकर प्रसाद खाते हैं। एप्पल के फाउंडर स्टीव जॉब्स


 फेसबुक के मार्क जुकरबर्ग


 हॉलीवुड एक्ट्रेस जूलिया रॉबर्ट्स 


और हमारे अपने विराट कोहली और अनुष्का शर्मा


 - सबका एक ही ठिकाना, बाबा नीम करोली का कैंची धाम।


इस ब्लॉग में हम सिर्फ कैंची धाम की नहीं, बल्कि नीम करोली बाबा से जुड़े उन सभी आश्रमों की पूरी और सच्ची कहानी बताएंगे जहाँ बाबा ने समय बिताया, तपस्या की और चमत्कार किए। अगर आप नैनीताल घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो ये ब्लॉग आपके लिए पूरा ट्रैवल गाइड है।

 1: नीम करोली बाबा कौन थे ?

 - लक्ष्मी नारायण से हनुमान भ क्त बनने की कहानी

नीम करोली बाबा का जन्म उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के अकबरपुर गाँव में हुआ था। उनका बचपन का नाम लक्ष्मी नारायण शर्मा था। बहुत कम उम्र में ही उनका विवाह हो गया था, लेकिन उनका मन सांसारिक जीवन में नहीं लगता था। 17 साल की उम्र में ही उन्होंने घर छोड़ दिया और साधु बन गए।

उन्हें हनुमान जी का परम भक्त और अवतार माना जाता है।

 कहा जाता है कि बाबा को कई सिद्धियाँ प्राप्त थीं, लेकिन उन्होंने कभी भी इसका दिखावा नहीं किया। वो हमेशा एक कंबल ओढ़े रहते थे, न माथे पर तिलक लगाते थे, न गले में माला पहनते थे। उनकी सादगी ही उनकी सबसे बड़ी पहचान थी। वो किसी को मंत्र नहीं देते थे, बस कहते थे - "राम को याद करो, सब ठीक हो जाएगा।"

बाबा ने अपने जीवन में 100 से ज्यादा हनुमान मंदिर बनवाए। 11 सितंबर 1973 को वृंदावन में उन्होंने अपना शरीर त्याग दिया, जिसे उनकी महासमाधि कहा जाता है। लेकिन भक्त आज भी मानते हैं कि बाबा यहीं हैं, अपने भक्तों के बीच।

 2: कैंची धाम की स्थापना - दो पहाड़ियों के बीच का चमत्कार

कैंची धाम नैनीताल से लगभग 17 किलोमीटर दूर भवाली-अल्मोड़ा रोड पर स्थित है। इस जगह का नाम कैंची धाम क्यों पड़ा? इसके पीछे दो कहानियाँ हैं। पहली, ये आश्रम दो पहाड़ियों के बीच ऐसी जगह पर बना है जहाँ सड़क कैंची की तरह दो मोड़ लेती है। दूसरी मान्यता ये है कि ये दो पहाड़ियों के कैंची जैसे आकार के बीच बसा है, इसलिए इसे कैंची धाम कहा गया।

बाबा पहली बार 1961 में यहाँ आए थे। उस समय यहाँ सिर्फ जंगल था। बाबा को ये जगह बहुत पसंद आई। उन्होंने अपने परम भक्त पूर्णानंद जी के साथ मिलकर 1964 में यहाँ आश्रम की स्थापना की। 15 जून 1964 को यहाँ पहले हनुमान मंदिर में मूर्ति की स्थापना हुई, इसलिए हर साल 15 जून को यहाँ स्थापना दिवस और विशाल मेले का आयोजन होता है। इस दिन यहाँ 2 लाख से ज्यादा लोग भंडारा प्रसाद ग्रहण करने आते हैं।

यहाँ की सबसे खास बात है यहाँ की शिप्रा नदी जो आश्रम के किनारे-किनारे बहती है। कहा जाता है कि इस नदी में स्नान करने से सारे पाप धुल जाते हैं।

 3: कैंची धाम आश्रम के अंदर क्या-क्या है?

जब आप आश्रम के अंदर प्रवेश करेंगे, तो आपको 3 मुख्य मंदिर दिखेंगे।

1. हनुमान जी का मंदिर: ये आश्रम का सबसे मुख्य और पहला मंदिर है। बाबा हनुमान जी के अनन्य भक्त थे, इसलिए उन्होंने सबसे पहले हनुमान जी के मंदिर की स्थापना की। इस मंदिर के ठीक ऊपर एक छोटा सा कमरा है, जहाँ बाबा बैठा करते थे।

2. बाबा नीम करोली का मंदिर: यहाँ बाबा की संगमरमर की एक बहुत ही सुंदर मूर्ति है। इसके पीछे बाबा का वो कंबल रखा हुआ है जिसे वो ओढ़ा करते थे। भक्त यहाँ बैठकर ध्यान लगाते हैं।

3. अन्य मंदिर: परिसर में भगवान राम, सीता माता, शिव जी, वैष्णो देवी और राम दरबार के छोटे-छोटे मंदिर भी हैं।

इसके अलावा यहाँ एक छोटा सा म्यूजियम, एक लाइब्रेरी और एक विशाल भंडारा हॉल है। पूरा आश्रम लाल और सफेद रंग से रंगा हुआ है और चारों तरफ फूलों से भरा बगीचा है। यहाँ फोटो खींचना मना है, ताकि शांति बनी रहे।

 4: बाबा के वो आश्रम जहाँ वो सुकून के लिए बैठते थे 

अधिकतर लोग सिर्फ कैंची धाम को जानते हैं, लेकिन बाबा के कई और भी सिद्ध आश्रम हैं। अगर आप सच में बाबा के भक्त हैं, तो आपको इन जगहों पर भी जरूर जाना चाहिए।

1. काकड़ीघाट आश्रम 

 बाबा के गुरु की तपोभूमि

ये आश्रम कैंची धाम से लगभग 30-35 किलोमीटर दूर भवाली से अल्मोड़ा जाते हुए रास्ते में पड़ता है। ये जगह बहुत ही एकांत में है और कोसी नदी के किनारे स्थित है। ये असल में सोमवारी महाराज की तपोस्थली है। सोमवारी महाराज को भगवान शिव का अवतार माना जाता है और बाबा नीम करोली उन्हें अपना गुरु मानते थे। बाबा अक्सर यहाँ आकर हफ्तों तक रहते थे। यहीं पर बाबा ने एक बहुत ही सुंदर शिव मंदिर और हनुमान मंदिर बनवाया। यहाँ का शिवलिंग बहुत ही प्राचीन है। अगर आप कैंची धाम जाते हैं तो काकड़ीघाट जरूर जाएं, यहाँ आपको कैंची धाम से भी ज्यादा शांति मिलेगी।

2. मौनी माँ आश्रम 

 जहाँ मौन ने सब कुछ कहा

ये आश्रम भीमताल से नौकुचियाताल रोड पर स्थित है। इसकी कहानी बहुत ही रोचक है। मौनी माँ, जिनका असली नाम लीला देवी था, वो बाबा की परम भक्त थीं और बहुत ज्यादा बोलती थीं। एक बार कैंची धाम में बाबा ने हँसते हुए कहा, "तू बहुत बोलती है, थोड़ा मौन रहा कर।" बस बाबा के इतना कहते ही मौनी माँ ने उसी दिन से आजीवन मौन व्रत धारण कर लिया। बाबा ने उन्हें भीमताल में रहने का आदेश दिया। मौनी माँ ने यहाँ सबसे पहले नीम करोली बाबा का मंदिर बनवाया। आज भी यहाँ मौनी माँ की समाधि है और यहाँ आने वाले भक्तों को बहुत शांति मिलती है।

3. वीरभद्र आश्रम, ऋषिकेश

 

 5 एकड़ में फैला विशाल आश्रम

ये आश्रम ऋषिकेश के वीरभद्र में स्थित है और लगभग 5 एकड़ में फैला हुआ है। बाबा की महासमाधि के बाद उनके दो प्रमुख शिष्याओं सिद्धि माँ और जीवंती माँ ने इस आश्रम का निर्माण करवाया था। ये आश्रम बहुत ही सुंदर और शांत जगह पर है। यहाँ भी हनुमान जी और बाबा के मंदिर हैं।

4. अन्य महत्वपूर्ण आश्रम: इसके अलावा वृंदावन आश्रम


 जहाँ बाबा ने समाधि ली, लखनऊ का हनुमान सेतु मंदिर

 और दिल्ली का महरौली आश्रम

 भी बाबा के प्रमुख आश्रमों में से हैं।

 5: वो कनेक्शन जिसने कैंची धाम को वर्ल्ड फेमस बना दिया

स्टीव जॉब्स और कैंची धाम: 1974 में जब स्टीव जॉब्स कॉलेज छोड़ चुके थे और जीवन में क्या करना है, ये समझ नहीं आ रहा था, तब वो अपने दोस्त डैनियल कोटके के साथ भारत आए। वो नैनीताल में कैंची धाम बाबा से मिलने आए, लेकिन तब तक बाबा महासमाधि ले चुके थे। लेकिन आश्रम में रहने के दौरान उन्हें जो शांति और सादगी का अनुभव हुआ, उसने उनकी पूरी सोच बदल दी। कहा जाता है कि एप्पल के लोगो में जो सादगी और डिजाइन है, वो यहीं से प्रेरित है।

मार्क जुकरबर्ग और कैंची धाम: जब फेसबुक अपने शुरुआती दौर में था और मार्क जुकरबर्ग को समझ नहीं आ रहा था कि कंपनी को बेच दें या चलाते रहें, तब स्टीव जॉब्स ने उन्हें सलाह दी कि तुम कैंची धाम जाओ। जुकरबर्ग 2008 में यहाँ आए और एक महीने तक रुके। भारत के प्रधानमंत्री के साथ एक इंटरव्यू में जुकरबर्ग ने खुद इस बात का जिक्र किया था कि कैंची धाम की यात्रा ने उन्हें अपने लक्ष्य पर टिके रहने की शक्ति दी।

विराट कोहली और अनुष्का शर्मा: विराट और अनुष्का कई बार यहाँ आ चुके हैं। 2022-23 में जब विराट खराब फॉर्म से गुजर रहे थे, उसके बाद वो यहाँ आए थे और उसके बाद उनका शानदार कमबैक हुआ। तब से विराट का कैंची धाम पर विश्वास और भी बढ़ गया।

 6: कैंची धाम के चमत्कार - लोग क्यों मानते हैं?

भक्तों का मानना है कि बाबा आज भी सूक्ष्म रूप में यहाँ मौजूद हैं। सबसे बड़ा चमत्कार तो यही है कि यहाँ आने वाला कोई भी व्यक्ति खाली हाथ नहीं जाता। यहाँ की भभूति से कई लोगों की बीमारियां ठीक होने की कहानियाँ प्रचलित हैं।

1963 में बाबा ने कहा था कि एक दिन यहाँ पूरी दुनिया से लोग आएंगे, और आज आप देख सकते हैं कि अमेरिका, यूरोप, जापान से लोग यहाँ आते हैं। आश्रम में आज भी हर दिन सुबह-शाम आरती होती है और भंडारा चलता है, जहाँ हर आने वाले को प्रसाद मिलता है।

 7: ट्रैवल गाइड - कैंची धाम कैसे पहुंचे, कब जाएं, कहाँ रुके

कैसे पहुंचे: सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन काठगोदाम है, जो कैंची धाम से 40 किमी दूर है। वहाँ से आप टैक्सी या बस से आसानी से पहुंच सकते हैं। नजदीकी एयरपोर्ट पंतनगर है, जो 70 किमी दूर है।

कब जाएं: घूमने का सबसे अच्छा समय मार्च से जून और सितंबर से नवंबर तक है। 15 जून को स्थापना दिवस पर जाना एक अलग ही अनुभव है, लेकिन उस दिन बहुत भीड़ होती है। सर्दियों में यहाँ बहुत ठंड होती है और बरसात में भूस्खलन का खतरा रहता है।

कहाँ रुके: आश्रम में ही कुछ कमरे हैं जो पहले से बुक करने पड़ते हैं। इसके अलावा भवाली और नैनीताल में 500 रुपये से लेकर 5000 रुपये तक के होटल और होमस्टे मिल जाते हैं।

आसपास घूमने की जगहें: कैंची धाम के साथ आप नैनीताल, भीमताल, मुक्तेश्वर, अल्मोड़ा, जागेश्वर धाम और कसार देवी मंदिर भी घूम सकते हैं।

कैंची धाम सिर्फ एक मंदिर नहीं, एक एहसास है। यहाँ की हवा में एक अलग ही सुकून है। अगर आप जीवन में कभी भी तनाव महसूस करें, तो एक बार कैंची धाम जरूर आइए। बाबा का आशीर्वाद आप पर हमेशा बना रहेगा। जय नीम करोली बाबा।

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Lakshya Bhatia
Founder, Bite & Roam · 47 cities explored

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