लखनऊ में त्योहारों का अपना ही एक अलग रंग है। यहां जब कोई धार्मिक या सांस्कृतिक पर्व मनाया जाता है, तो उसमें सिर्फ पूजा और धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं होते, बल्कि पूरा माहौल उत्सव में बदल जाता है। लोग परिवार के साथ घर से निकलते हैं, मंदिरों में दर्शन करते हैं, मेलों में घूमते हैं, अलग-अलग कार्यक्रमों का आनंद लेते हैं और अपने साथ ढेर सारी खूबसूरत यादें लेकर वापस लौटते हैं।

  लखनऊ में त्योहारों का अपना ही एक अलग रंग है। यहां जब कोई धार्मिक या सांस्कृतिक पर्व मनाया जाता है, तो उसमें सिर्फ पूजा और धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं होते, बल्कि पूरा माहौल उत्सव में बदल जाता है। लोग परिवार के साथ घर से निकलते हैं, मंदिरों में दर्शन करते हैं, मेलों में घूमते हैं, अलग-अलग कार्यक्रमों का आनंद लेते हैं और अपने साथ ढेर सारी खूबसूरत यादें लेकर वापस लौटते हैं।

इस बार 15 अगस्त 2026 का दिन भी कुछ ऐसा ही खास रहा। एक तरफ पूरे देश में स्वतंत्रता दिवस का उत्साह था, वहीं दूसरी तरफ सावन की हरियाली तीज का पर्व भी श्रद्धा और उमंग के साथ मनाया गया। लखनऊ में हरियाली तीज के अवसर पर बीरबल साहनी मार्ग स्थित खाटू श्याम जी मंदिर में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जहां धार्मिक माहौल के साथ मेले और विभिन्न प्रतियोगिताओं ने लोगों का खूब ध्यान खींचा।

Bite and Roam की टीम भी इस खास आयोजन को कैमरे में कैद करने पहुंची। यहां पहुंचकर हमें सिर्फ एक धार्मिक कार्यक्रम देखने को नहीं मिला, बल्कि भक्ति, उत्साह, मेले की रौनक और लोगों की भागीदारी से भरा एक खूबसूरत माहौल देखने को मिला।

अगर आप लखनऊ में रहते हैं और शहर में होने वाले धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों को करीब से देखना पसंद करते हैं, तो हरियाली तीज का यह आयोजन आपके लिए भी दिलचस्प हो सकता है।


आइए जानते हैं कि इस आयोजन में क्या खास रहा और आखिर हरियाली तीज का पर्व इतना महत्वपूर्ण क्यों माना जाता है।


हरियाली तीज क्या है?

हरियाली तीज सावन महीने में मनाया जाने वाला एक प्रमुख हिंदू त्योहार है। यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित माना जाता है। खासतौर पर महिलाओं के बीच हरियाली तीज का विशेष महत्व है।


सावन का महीना आते ही प्रकृति का रूप पूरी तरह बदल जाता है। बारिश के बाद पेड़-पौधे हरे-भरे हो जाते हैं, वातावरण में ठंडक और ताजगी आ जाती है और चारों तरफ हरियाली दिखाई देती है। इसी कारण सावन में मनाई जाने वाली इस तीज को हरियाली तीज कहा जाता है।


हरियाली तीज को माता पार्वती की भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए की गई तपस्या और उनके समर्पण से भी जोड़ा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए लंबे समय तक तपस्या की थी। इसी वजह से यह पर्व प्रेम, समर्पण, वैवाहिक सुख और पारिवारिक खुशहाली की भावना से भी जुड़ा हुआ है।

इस दिन कई महिलाएं व्रत रखती हैं, भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं और अपने परिवार की सुख-समृद्धि तथा वैवाहिक जीवन की खुशहाली की कामना करती हैं।


हरियाली तीज पर हरे रंग का विशेष महत्व माना जाता है। महिलाएं हरे रंग के कपड़े पहनती हैं, हरी चूड़ियां पहनती हैं और हाथों में मेहंदी लगाती हैं। कई स्थानों पर झूले लगाए जाते हैं और सावन के पारंपरिक गीतों के साथ त्योहार का आनंद लिया जाता है।

यानी हरियाली तीज सिर्फ एक धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, प्रकृति, परिवार और परंपराओं का खूबसूरत मेल भी है।


लखनऊ में खाटू श्याम मंदिर में हुआ खास आयोजन


हरियाली तीज के अवसर पर लखनऊ के बीरबल साहनी मार्ग स्थित खाटू श्याम जी मंदिर में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया।


मंदिर में इस अवसर पर श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की अच्छी भागीदारी देखने को मिली। लोग भगवान के दर्शन करने और आशीर्वाद लेने के साथ-साथ कार्यक्रम और मेले का आनंद लेने के लिए भी पहुंचे।


आमतौर पर मंदिर में होने वाले धार्मिक आयोजनों की अपनी एक अलग गरिमा होती है। लेकिन जब किसी त्योहार के अवसर पर मेले और सांस्कृतिक गतिविधियां भी जुड़ जाती हैं, तो पूरा वातावरण और ज्यादा जीवंत हो जाता है।


इस आयोजन में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला।


मंदिर परिसर और आसपास लोगों की चहल-पहल रही। श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे और इसके साथ ही मेले में लगे अलग-अलग स्टॉल भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बने।

परिवार के साथ आए लोगों के लिए यह आयोजन खास रहा। बच्चे हों या बड़े, हर किसी के लिए यहां कुछ न कुछ देखने और अनुभव करने को था।


मेले में लगे अलग-अलग स्टॉल


हरियाली तीज के इस आयोजन में कई तरह के स्टॉल लगाए गए थे। मेले में स्टॉल होने की वजह से लोगों के पास घूमने और देखने के लिए काफी कुछ था।


ऐसे धार्मिक मेलों की सबसे अच्छी बात यही होती है कि यहां सिर्फ पूजा या दर्शन तक कार्यक्रम सीमित नहीं रहता। लोग परिवार के साथ आते हैं, आसपास घूमते हैं और एक-दूसरे के साथ समय बिताते हैं।


आज की व्यस्त जिंदगी में जब परिवार के सभी सदस्यों के पास एक साथ बैठने और समय बिताने के लिए कम समय होता है, तब ऐसे आयोजन परिवारों को एक साथ लाने का काम करते हैं।


बच्चों के लिए मेला हमेशा आकर्षण का केंद्र होता है। उनके लिए रंग-बिरंगे स्टॉल और आयोजन की चहल-पहल अपने आप में एक अलग अनुभव होती है। वहीं बड़े लोग धार्मिक वातावरण और कार्यक्रम का आनंद लेते हैं।


यही वजह है कि हरियाली तीज का यह आयोजन सिर्फ एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं लगा, बल्कि एक पारिवारिक उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला।


प्रतियोगिताओं ने बढ़ाया आयोजन का उत्साह


इस कार्यक्रम की सबसे खास बातों में से एक थी यहां आयोजित की गई प्रतियोगिताएं।


कार्यक्रम में अलग-अलग प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, जिसमें लोगों ने उत्साह के साथ भाग लिया। प्रतियोगिताओं की वजह से कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच उत्सुकता और उत्साह और भी बढ़ गया।


किसी भी मेले या उत्सव में प्रतियोगिता का आयोजन लोगों को सिर्फ दर्शक बनकर रहने के बजाय कार्यक्रम का हिस्सा बनने का मौका देता है।


जो लोग प्रतियोगिता में भाग लेते हैं, उनके लिए पूरा कार्यक्रम और भी यादगार हो जाता है। वहीं बाकी लोग प्रतियोगियों का उत्साह बढ़ाते हैं और परिणाम का इंतजार करते हैं।


इस आयोजन में भी प्रतियोगिताओं ने लोगों को जोड़ने का काम किया।


लोग प्रतियोगिताओं को देखते रहे, प्रतिभागियों का उत्साह बढ़ाते रहे और यह जानने के लिए उत्सुक रहे कि आखिर विजेता कौन बनेगा।


लेकिन प्रतियोगिताओं का सबसे बड़ा आकर्षण उनके पुरस्कार रहे।


फर्स्ट प्राइज में मिली Honda की स्कूटी

इस आयोजन में प्रतियोगिता के विजेताओं के लिए शानदार पुरस्कार रखे गए थे।


सबसे बड़ा आकर्षण रहा फर्स्ट प्राइज।


प्रथम पुरस्कार के रूप में विजेता को Honda की स्कूटी दी गई।


किसी प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाले व्यक्ति के लिए इससे बड़ी खुशी क्या होगी कि वह प्रतियोगिता जीतने के बाद एक शानदार पुरस्कार अपने घर लेकर जाए।


Honda की स्कूटी को फर्स्ट प्राइज के रूप में रखा जाना निश्चित रूप से इस आयोजन की सबसे चर्चित बातों में से एक रहा।


ऐसे पुरस्कार प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाले लोगों का उत्साह बढ़ाते हैं। साथ ही वहां मौजूद बाकी लोगों को भी आगे होने वाले आयोजनों में हिस्सा लेने के लिए प्रेरित करते हैं।


सोचिए, कोई व्यक्ति सिर्फ कार्यक्रम देखने के लिए आया हो और वहां उसे प्रतियोगिता में हिस्सा लेने का मौका मिले। फिर वह प्रतियोगिता जीत जाए और उसे Honda की स्कूटी मिल जाए। उसके लिए वह दिन जिंदगी भर याद रहने वाला बन सकता है।


अन्य विजेताओं को मिले 50 ग्राम के चांदी के सिक्के

सिर्फ फर्स्ट प्राइज ही आकर्षण का केंद्र नहीं था।


कार्यक्रम में अन्य विजेताओं के लिए भी अच्छे पुरस्कार रखे गए थे।


अन्य विजेताओं को 50 ग्राम के चांदी के सिक्के पुरस्कार के रूप में दिए गए।


भारतीय संस्कृति में चांदी को शुभ और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक आयोजनों में चांदी का सिक्का देना भी एक सुंदर परंपरा जैसा लगता है।


इस आयोजन में भी 50 ग्राम के चांदी के सिक्कों को पुरस्कार के रूप में रखा जाना लोगों के लिए आकर्षण का कारण रहा।


इस तरह प्रतियोगिता में भाग लेने वाले लोगों के लिए अलग-अलग स्तर पर पुरस्कार रखे गए थे, जिससे प्रतियोगिता का उत्साह बना रहा।


हरियाली तीज का धार्मिक महत्व


हरियाली तीज का धार्मिक महत्व बहुत गहरा है।


यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य संबंध से जुड़ा हुआ माना जाता है। माता पार्वती की तपस्या और भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने की कथा इस पर्व के धार्मिक महत्व का प्रमुख हिस्सा है।


कई महिलाएं इस दिन अपने पति की लंबी उम्र और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए व्रत रखती हैं।

अविवाहित लड़कियां भी अच्छे जीवनसाथी और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ इस पर्व को मनाती हैं।


हालांकि अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में तीज मनाने की परंपराएं अलग हो सकती हैं, लेकिन हर जगह इस त्योहार में श्रद्धा और उत्साह देखने को मिलता है।


हरियाली तीज में प्रकृति का महत्व


हरियाली तीज का नाम ही अपने आप में प्रकृति से इसका संबंध बताता है।


सावन का महीना बारिश का महीना होता है। बारिश के बाद सूखी धरती फिर से हरी होने लगती है। पेड़-पौधों पर नई पत्तियां आती हैं और वातावरण में ताजगी भर जाती है।


इसी हरियाली और प्रकृति की सुंदरता को त्योहार के साथ जोड़ा गया है।


हरे रंग के कपड़े, हरी चूड़ियां और मेहंदी इस त्योहार की लोकप्रिय पहचान बन चुके हैं।


कई जगह महिलाएं पेड़ों पर झूले डालकर झूला झूलती हैं और सावन के गीत गाती हैं।


आज शहरों में यह परंपरा पहले की तुलना में कम दिखाई देती है, लेकिन त्योहारों के माध्यम से इसे आज भी जीवित रखा जा रहा है।


हरियाली तीज और महिलाओं की भागीदारी


हरियाली तीज महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखने वाला पर्व है।


इस दिन महिलाएं पारंपरिक कपड़े पहनती हैं, मेहंदी लगाती हैं और पूजा-अर्चना करती हैं। कई महिलाएं व्रत भी रखती हैं।


विवाहित महिलाओं के लिए यह पर्व पति और परिवार की खुशहाली की कामना से जुड़ा है, जबकि अविवाहित लड़कियां अच्छे जीवनसाथी की कामना के लिए तीज का व्रत रखती हैं।


लेकिन आज के समय में तीज केवल व्रत और पूजा तक सीमित नहीं है।


यह महिलाओं के एक साथ मिलने, सजने-संवरने, गीत-संगीत और सामाजिक मेलजोल का भी अवसर बन गया है।


इसी वजह से तीज के अवसर पर जगह-जगह विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।


लखनऊ के खाटू श्याम मंदिर में भी आयोजित कार्यक्रम ने इसी उत्सव की भावना को सामने रखा।


मंदिर में धार्मिक माहौल और मेले की रौनक


इस आयोजन की सबसे खूबसूरत बात यही रही कि यहां धार्मिक वातावरण और मेले की रौनक दोनों एक साथ दिखाई दी।


एक तरफ श्रद्धालु भगवान खाटू श्याम जी के दर्शन कर रहे थे, वहीं दूसरी तरफ लोग मेले में घूम रहे थे और कार्यक्रम का आनंद ले रहे थे।


धार्मिक आयोजन में इस तरह का संतुलन लोगों को ज्यादा आकर्षित करता है।


परिवार के बड़े लोग पूजा और दर्शन में शामिल होते हैं, बच्चे मेले का आनंद लेते हैं और युवा कार्यक्रम की तस्वीरें और वीडियो बनाकर अपने साथ यादें ले जाते हैं।


आज सोशल मीडिया के दौर में ऐसे आयोजन लोगों के लिए अपने शहर को नए तरीके से देखने का मौका भी बनते हैं।


किसी भी स्थानीय आयोजन की असली खूबसूरती वहां मौजूद लोगों के उत्साह में दिखाई देती है।


और इस आयोजन में भी लोगों की भागीदारी ने पूरे माहौल को खास बनाया।


लखनऊ की संस्कृति में ऐसे आयोजनों की भूमिका


लखनऊ सिर्फ अपनी तहजीब और ऐतिहासिक विरासत के लिए ही प्रसिद्ध नहीं है।


यह शहर अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए भी जाना जाता है।


पूरे साल लखनऊ में अलग-अलग धार्मिक पर्व, मेले और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होते रहते हैं।


ऐसे कार्यक्रम शहर के लोगों को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़कर रखते हैं।


हरियाली तीज का यह आयोजन भी इसी परंपरा का एक हिस्सा था।


आधुनिक जिंदगी में लोग चाहे कितने भी व्यस्त हो जाएं, त्योहार उन्हें अपनी जड़ों से जोड़ने का काम करते हैं।


जब लोग मंदिर जाते हैं, पूजा करते हैं, परिवार के साथ समय बिताते हैं और सामूहिक रूप से त्योहार मनाते हैं, तो संस्कृति सिर्फ किताबों में नहीं रहती, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनी रहती है।


15 अगस्त और हरियाली तीज का खास संयोग


इस साल 15 अगस्त की तारीख भी खास रही क्योंकि इसी दिन स्वतंत्रता दिवस के साथ हरियाली तीज का पर्व मनाया गया।


एक तरफ पूरे देश में तिरंगे और देशभक्ति का माहौल था।


दूसरी तरफ सावन की हरियाली, तीज की परंपराएं और धार्मिक आयोजन लोगों को अपनी संस्कृति से जोड़ रहे थे।


इस तरह 15 अगस्त 2026 का दिन दो अलग-अलग लेकिन महत्वपूर्ण भावनाओं का संगम बन गया।


स्वतंत्रता दिवस हमें देश की आजादी और स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान की याद दिलाता है, वहीं हरियाली तीज हमारी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ने का अवसर देती है।


लखनऊ में भी इस खास दिन की अपनी अलग रौनक देखने को मिली।


खाटू श्याम जी की भक्ति


खाटू श्याम जी के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था देश के अलग-अलग हिस्सों में देखने को मिलती है।


लोग प्रेम और श्रद्धा से बाबा श्याम का नाम लेते हैं और उनके दर्शन के लिए मंदिरों में पहुंचते हैं।


जब किसी खाटू श्याम मंदिर में विशेष पर्व का आयोजन होता है, तो श्रद्धालुओं के लिए उसका महत्व और बढ़ जाता है।


हरियाली तीज के इस आयोजन में भी धार्मिक भावना मुख्य रूप से दिखाई दी।


दर्शन, पूजा और कार्यक्रम के बीच लोगों ने अपने परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताया और त्योहार का आनंद लिया।


यही धार्मिक आयोजनों की खासियत होती है कि यहां आने वाला व्यक्ति केवल कार्यक्रम देखने नहीं आता, बल्कि अपने मन में श्रद्धा और विश्वास लेकर आता है।


परिवार के साथ त्योहार मनाने का आनंद


आज के समय में त्योहारों का एक बड़ा महत्व यह भी है कि वे परिवार को साथ लेकर आते हैं।


भागदौड़ भरी जिंदगी में हर किसी के पास अपने काम और जिम्मेदारियां हैं।


लेकिन त्योहार आते ही लोग कुछ समय निकालकर परिवार के साथ बाहर निकलते हैं।


बच्चे, माता-पिता, भाई-बहन और दोस्त जब साथ किसी धार्मिक आयोजन में जाते हैं, तो सिर्फ पूजा नहीं होती, बल्कि कई नई यादें भी बनती हैं।


हरियाली तीज के इस आयोजन में मेले और प्रतियोगिताओं की वजह से बच्चों और युवाओं के लिए भी उत्साह बना रहा।


बड़ों के लिए धार्मिक माहौल था और बच्चों के लिए मेले की रौनक।


यानी एक ही आयोजन में अलग-अलग उम्र के लोगों के लिए अलग-अलग खुशी मौजूद थी।


ऐसे आयोजन क्यों जरूरी हैं?


त्योहारों और धार्मिक आयोजनों का महत्व सिर्फ पूजा तक सीमित नहीं है।


ये समाज को जोड़ने का भी काम करते हैं।


लोग एक-दूसरे से मिलते हैं, परिवार साथ आता है और नई पीढ़ी अपनी परंपराओं को करीब से देखती है।


आज जब बच्चों का काफी समय मोबाइल और इंटरनेट पर बीतता है, ऐसे आयोजन उन्हें वास्तविक जीवन की संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का अवसर देते हैं।


वे देखते हैं कि त्योहार कैसे मनाए जाते हैं, लोग मंदिर क्यों जाते हैं, पूजा का क्या महत्व है और परिवार के साथ समय बिताना कितना अच्छा अनुभव हो सकता है।


इसीलिए ऐसे आयोजनों का महत्व सिर्फ उस दिन तक सीमित नहीं रहता।


ये आने वाली पीढ़ियों तक हमारी परंपराओं को पहुंचाने का माध्यम भी बनते हैं।


Bite and Roam की नजर से यह खास आयोजन


Bite and Roam के लिए किसी जगह को कवर करने का मतलब सिर्फ वहां जाकर वीडियो बनाना नहीं है।


हमारी कोशिश होती है कि किसी जगह या आयोजन की पूरी कहानी सामने आए।


वहां का माहौल कैसा है?


लोग क्यों आ रहे हैं?


क्या खास हो रहा है?


क्या चीज इस आयोजन को बाकी कार्यक्रमों से अलग बनाती है?


और अगर कोई व्यक्ति पहली बार वहां जाए, तो उसे क्या अनुभव मिलेगा?


खाटू श्याम मंदिर में हरियाली तीज का यह आयोजन इन सभी सवालों के जवाब देता हुआ नजर आया।


यहां भक्ति थी।


यहां मेले की रौनक थी।


यहां अलग-अलग स्टॉल थे।


यहां प्रतियोगिताएं थीं।


यहां पुरस्कारों को लेकर उत्साह था।


और सबसे महत्वपूर्ण बात, लोगों में त्योहार को लेकर खुशी थी।


हमने इस पूरे अनुभव को कैमरे में कैद करने की कोशिश की ताकि जो लोग इस आयोजन में नहीं पहुंच पाए, वे भी इसकी झलक देख सकें।


ऐसे आयोजनों की खूबसूरती छोटी-छोटी चीजों में छिपी होती है।


मंदिर में दर्शन के लिए जाते लोग।


कार्यक्रम को ध्यान से देखते श्रद्धालु।


मेले में घूमते बच्चे।


प्रतियोगिता में भाग लेते प्रतिभागी।


जीतने के बाद खुश होते विजेता।


और परिवार के साथ त्योहार का आनंद लेते लोग।


यही छोटी-छोटी तस्वीरें मिलकर किसी बड़े आयोजन की पूरी कहानी बनाती हैं।


हरियाली तीज की परंपराएं आज भी क्यों खास हैं?


समय बदलता रहता है, लेकिन कुछ परंपराएं ऐसी होती हैं जो पीढ़ियों के साथ चलती रहती हैं।


हरियाली तीज भी ऐसी ही एक परंपरा है।


आज महिलाएं पहले की तरह ही मेहंदी लगाती हैं, हरी चूड़ियां पहनती हैं, पूजा करती हैं और तीज का व्रत रखती हैं।


कई जगह झूले लगाए जाते हैं और सावन के गीतों की परंपरा भी निभाई जाती है।


शहरों में त्योहार मनाने का तरीका जरूर बदला है, लेकिन त्योहार की भावना आज भी वही है।


परिवार के लिए शुभकामना।


सुख-समृद्धि की कामना।


पति और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना।


और सबसे बढ़कर, साथ मिलकर खुशियां मनाना।


इसी वजह से हरियाली तीज आज भी लोगों के बीच उतनी ही लोकप्रिय है।


इस आयोजन की सबसे खास बातें


अगर इस पूरे आयोजन को कुछ खास बातों में समेटें, तो कई चीजें सामने आती हैं।


सबसे पहले, हरियाली तीज के अवसर पर आयोजित भव्य धार्मिक कार्यक्रम।


दूसरा, बीरबल साहनी मार्ग स्थित खाटू श्याम जी मंदिर का धार्मिक वातावरण।


तीसरा, मेले में लगाए गए विभिन्न स्टॉल।


चौथा, लोगों के लिए आयोजित की गई प्रतियोगिताएं।


पांचवां, प्रतियोगिता के फर्स्ट प्राइज में Honda की स्कूटी।


छठा, अन्य विजेताओं को दिए गए 50 ग्राम के चांदी के सिक्के।


और सातवां, परिवारों और श्रद्धालुओं की उत्साहपूर्ण भागीदारी।


इन सभी चीजों ने मिलकर इस आयोजन को खास बना दिया।


अगर आप लखनऊ में रहते हैं


अगर आप लखनऊ में रहते हैं और आपको शहर के धार्मिक, सांस्कृतिक और स्थानीय कार्यक्रमों को देखना पसंद है, तो ऐसे आयोजन जरूर देखने चाहिए।


ऐसे कार्यक्रमों में आपको सिर्फ एक धार्मिक स्थल देखने का मौका नहीं मिलता, बल्कि शहर की स्थानीय संस्कृति को करीब से समझने का अवसर भी मिलता है।


आप देख सकते हैं कि लोग त्योहार कैसे मनाते हैं।


परिवार किस तरह साथ आता है।


बच्चे किस तरह इन परंपराओं को देखते हैं।


और किस तरह धार्मिक आयोजन धीरे-धीरे पूरे सामुदायिक उत्सव में बदल जाते हैं।


यही अनुभव किसी शहर को सिर्फ एक जगह नहीं, बल्कि एक कहानी बनाते हैं।


मंदिर और धार्मिक आयोजनों में ध्यान रखने वाली बातें


किसी भी मंदिर या धार्मिक आयोजन में जाते समय कुछ सामान्य बातों का ध्यान रखना जरूरी है।


सबसे पहले मंदिर की गरिमा और धार्मिक भावनाओं का सम्मान करें।


भीड़ होने पर अपने बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें।


मंदिर परिसर में साफ-सफाई बनाए रखें।


कूड़ा इधर-उधर न फेंकें।


जहां फोटोग्राफी या वीडियो बनाने की अनुमति न हो, वहां कैमरा या मोबाइल इस्तेमाल न करें।


मंदिर की व्यवस्था में लगे स्वयंसेवकों और कर्मचारियों का सहयोग करें।


और सबसे जरूरी बात, धार्मिक स्थल पर जाने का उद्देश्य सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि श्रद्धा और सकारात्मक अनुभव भी होना चाहिए।


यही छोटी-छोटी बातें किसी आयोजन को सुंदर और व्यवस्थित बनाए रखती हैं।


लखनऊ में त्योहारों की खूबसूरती


लखनऊ की खासियत यही है कि यहां त्योहार सिर्फ घरों के अंदर नहीं मनाए जाते।


शहर के अलग-अलग हिस्सों में धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन होते हैं और लोग उनमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं।


हरियाली तीज का यह आयोजन भी इसी खूबसूरत परंपरा का उदाहरण रहा।


एक तरफ सावन की हरियाली और तीज की धार्मिक भावना।


दूसरी तरफ मंदिर में खाटू श्याम जी की भक्ति।


इसके साथ मेले की चहल-पहल और प्रतियोगिताओं का उत्साह।


यानी पूरा आयोजन अपने आप में एक ऐसी कहानी बन गया, जिसमें धर्म, संस्कृति और मनोरंजन तीनों दिखाई दिए।


अंत में


तो कुल मिलाकर लखनऊ के बीरबल साहनी मार्ग स्थित खाटू श्याम जी मंदिर में हरियाली तीज के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम एक खूबसूरत धार्मिक और सांस्कृतिक अनुभव रहा।


यहां श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन किए, लोगों ने मेले का आनंद लिया, अलग-अलग स्टॉल देखे और प्रतियोगिताओं में भाग लिया।


प्रतियोगिताओं में विजेताओं के लिए आकर्षक पुरस्कार भी रखे गए।


फर्स्ट प्राइज में Honda की स्कूटी ने सबका ध्यान खींचा, जबकि अन्य विजेताओं को 50 ग्राम के चांदी के सिक्के दिए गए।


लेकिन किसी भी त्योहार की सबसे बड़ी खूबसूरती सिर्फ उसके कार्यक्रम या पुरस्कार नहीं होते।


असली खूबसूरती होती है लोगों की मुस्कान में।


परिवार के साथ बिताए गए समय में।


भगवान के दर्शन के बाद मिलने वाली शांति में।


बच्चों के उत्साह में।


प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वालों की मेहनत में।


और उन यादों में जिन्हें हम अपने साथ घर लेकर जाते हैं।


हरियाली तीज हमें प्रकृति, परंपरा, प्रेम और परिवार की अहमियत याद दिलाती है।


सावन की हरियाली और तीज का यह पर्व भारतीय संस्कृति की उस खूबसूरत परंपरा का हिस्सा है, जो पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ती चली आ रही है।


और जब यही त्योहार लखनऊ जैसे खूबसूरत शहर में किसी मंदिर के भव्य आयोजन के साथ मनाया जाता है, तो उसकी रौनक और भी बढ़ जाती है।


इस बार 15 अगस्त का दिन भी खास रहा। स्वतंत्रता दिवस और हरियाली तीज का संयोग इस दिन को और यादगार बना गया।


अगर आप लखनऊ के रहने वाले हैं और आपको शहर की ऐसी जगहों, धार्मिक आयोजनों, मेलों, स्थानीय कार्यक्रमों और दिलचस्प अनुभवों के बारे में जानना पसंद है, तो Bite and Roam के साथ जुड़े रहिए।


हम कोशिश करेंगे कि लखनऊ और आसपास की ऐसी ही जगहों और आयोजनों की कहानी आप तक पहुंचाते रहें।


क्योंकि हमारा मानना है कि घूमना सिर्फ नई जगह देखना नहीं है।


घूमना मतलब लोगों को देखना।


संस्कृति को समझना।


परंपराओं को महसूस करना।


नई चीजों का अनुभव करना।


और उन अनुभवों को दूसरों के साथ साझा करना।


यही है Bite and Roam।


जय श्री श्याम।

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Lakshya Bhatia
Founder, Bite & Roam · 47 cities explored

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